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जिन्हें हम 'इन्तेज़ार' और आप 'वक़्त' कहते हैं

जिन्हें हम 'इन्तेज़ार' और आप 'वक़्त' कहते हैं
हम एक रिश्ता और आप एक लफ्ज़ कहते हैं,

शुक्रवार, 18 सितंबर 2009

मान न मान, मैं तेरा मेहमान

नई सड़क पर एक आदमी चला जा रहा था. उसे देखकर एक व्यक्ति बोला- " कहाँ जा रहे हो ?"
वो आदमी बोला- "अपने घर जा रहा हूँ ।"
" क्यों जा रहे हो ?"
"काम से लौट रहा हूँ, इसलिए ..."
"अच्छा-अच्छा...पर काम क्या करते हो..?"
" मैं बुनकर हूँ । नए-नए कपड़े तैयार करता हूँ।"
"और तुम्हारी बीवी...? वो क्या करती है॥?"
"वो मेरे लिए खाना बनाती है।"
"वो खाना क्यों बनाती है ?"
"क्योंकि मैं उसके लिए काम करता हूँ।"
कुछ लोग बिल्कुल इसी प्रकार के होते हैं, बाल में से खाल निकालनेवाले । आपको उनसे कुछ लेना-देना हो न हो, वो आपको यूँ ही परेशान करते रहेंगे। ऐसे लोगों से कैसे बचा जाए?

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