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जिन्हें हम 'इन्तेज़ार' और आप 'वक़्त' कहते हैं

जिन्हें हम 'इन्तेज़ार' और आप 'वक़्त' कहते हैं
हम एक रिश्ता और आप एक लफ्ज़ कहते हैं,

गुरुवार, 24 सितंबर 2009

आभा पूर्वे का कहानी संग्रह-प्रकाशक : मनप्रीत प्रकाशन, १६/१६, प्रथम तल, गीता कालोनी, नई दिल्ली-३१ संस्करण : २००३, मूल्य- १००/-




चन्दन जल न जाए

(आभा पूर्वे का कहानी संग्रह)

अभी कुछ दिनों पहले भागलपुर की कहानीकार श्रीमती आभा पूर्वे का कहानी संग्रह 'चंदन जल न जाए' पढने का मौक़ा मिला। एक अद्भुत संतोष का अनुभव हुआ। आभा पूर्वे की कहानियाँ गागर में सागर हैं। अपनी प्रकृति में ये कहानियाँ लघुकथा के निकट जान पड़ती हैं। जिस प्रकार लघुकथाओं में एक प्रश्नातुर चिंता दिखती है, उसी प्रकार इनकी कहानियों में भी। गठन को लेकर हठीलापन जिस प्रकार लघुकथाओं में नहीं होता, उसी प्रकार आभा जी की कहानियाँ भी इस हठ से मुक्त हैं। सहज प्रवाह में, भाव-प्रवणता में जो सत्य बहता हुआ चला आया है, उसे ही कहानीकार द्वारा जस-का-तस रख दिया गया है। इसीलिए भाषिक आलंकारिकता और चमत्कारपूर्ण व्यंजनाओं से मुक्त ये कहानियाँ कहीं-न-कहीं मन को छूती हैं अपने बेबाकपन से, गुदगुदाती हैं अपनी सहजता से और उद्वेलित करती हैं अपने भीतर से उठते प्रश्नों से। फिर भी, आभा पूर्वे की कहानियाँ चिंतन-प्रधान मानी जाएँगी, जिनमें विवरण का आधिक्य नहीं है, परन्तु अपने कलेवर में ये कहानियाँ नितांत सामाजिक हैं.





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